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Limbs of Yoga Meditation - Yoga Ke Ang - Yog Ke Aath Ang

1. यम: - यम अनुशासन का वह साधन है, जो कि प्रत्येक मनुष्य के मन से संबंध रखता है। इसके अभ्यास करने से मनुष्य अहिंसा, सच्चाई, चोरी न करना, पवित्रता व त्याग करना सीखता है। .

2. नियम : - नियम वे तरीके हैं जो मनुष्य के शारीरिक अनुशासन से संबंधित हैं। शरीर तथा मन की शुद्धि संतोष, दृढ़ता और ईश-आराधना जैसे कि शरीर की सफाई नेति, धोती व बस्ती द्वारा तैयार की जाती है।.

3. आसन : - मनुष्य शरीर को ज्यादा से ज्यादा समय के लिये विशेष स्थिति में रखने को आसन कहते हैं। जैसे - रीढ़ की हड्डी को बिल्कुल सीधा रखकर टांगों को किसी विशेष दिशा में रखकर बैठने को पद्मासन कहते हैं।.

4. प्राणायाम : - एक स्थिर स्थान पर बैठकर किसी विशेष विधि के अनुसार सांस अन्दर खींचने तथा बाहर निकालने की विधि को प्राणायाम कहते हैं। .

5. प्रत्याहार : - प्रत्याहार का मतलब है मन तथा इन्द्रियों को उनकी संबंधित क्रिया से हटकर परमात्मा की ओल लगाना है। .

6. धारणा : - इसका मतलब अपने मन को किसी इच्छित विषय में लगाना है। इस प्रकार एक ओर ध्यान लगाने से मनुष्य में एक महान शक्ति पैदा हो जाती है, जिसके साथ उसके मन की इच्छा पूरी हो जाती है।

7. ध्यान : - ध्यान धारणा से ऊंची अवस्था है, जिसमें मनुष्य सांसारिक मोह-जाल से ऊपर उठ जाता है और अपने आप में अन्तर्ध्यान हो जाता है।

8. समाधि : - समाधि के समय मनुष्य की आत्मा परमात्मा में लीन हो जाती है। .