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Om Mantra Ka Mahatva - Importance of Om - Aum Ka Mahatva

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ओउम् शब्द इस दुनिया में किसी ना किसी रूप में सभी मुख्य संस्कृतियों का प्रमुख भाग है। हिन्दू धर्म में ऋषि-मुनियों के अुनसार ओउम् शब्द के तीन अक्षरों से अलग-अलग अर्थ निकलते हैं। यह ओउम् शब्द तीन अक्षरों से मिलकर बना है। अ, उ, म। प्रत्येक अक्षर ईश्वर के अलग-अलग नामों को अपने आप में समेटे हुये है। ओउम् का उच्चारण मात्र से ही शरीर के अलग-अलग भागों में कंपन होता है। जैसे ‘अ’ शरीर के निचले भाग में (पेट के करीब) कंपन होता है। ‘उ’ शरीर के मध्य भाग में (छाती के करीब) कंपन होता है और ‘म’ शरीर के ऊपरी भाग में (मस्तिष्क) कंपन होता है।

ओउम् इस संपूर्ण ब्रह्माण्ड में उसी तरह भरा हुआ है जैसे कि आकाश। ओउम् का जाप करने से जो आनन्द और शांति अनुभव होती है, वैसी शान्ति किसी और शब्द के उच्चारण से नहीं आती। यही कारण है कि सब जगह बहुत लोकप्रिय होने वाली आसन प्राणायाम की कक्षाओं में ओउम् के उच्चारण का बहुत महत्व है। बहुत ज्यादा मानसिक तनाव व अवसाद से ग्रसित लोगों पर कुछ ही दिनों में इसका जादू सा प्रभाव होता है। इसी कारण डॉक्टर भी अपने मरीजों को प्राणायाम आसन करने की सलाह देते हैं।

ओउम् को जानने का अर्थ है भगवान को जान लेना। समस्त वेद ओउम् के महत्व की व्याख्या करते है। अनेक विचारधाराओं में ओउम् की प्रतिष्ठा को सिद्ध किया गया है। ओउम् को अपनाकर ज्ञान प्राप्त किया जा सकता है। साधना तपस्या के द्वारा ओउम् का चिन्तन करके व्यक्ति अपने पापों से मुक्त हो जाता है और मोक्ष को प्राप्त करता है। इसे प्रणव मंत्र भी कहा जाता है। यह ब्रह्माण्ड की अनाहत ध्वनि है और संपूर्ण ब्रह्माण्ड में यह अनवरत जारी है इसका न आरंभ है न अंत। जो भी ओउम् का उच्चारण करता है उसके आसपास सकारात्मक ऊर्जा का संचार होने लगता है। ओउम् के चिंतन मनन द्वारा समस्त समस्याओं से मुक्त हो चित्त को एकाग्र करके साधक भाव में समाने लगता है। इसमें लीन व्यक्ति विषय वासनाओं से दूर रहता है और परमतत्व का अनुभव करता है। अनेक धार्मिक क्रिया-कलापों में ओउम् शब्द का उचारण होता है। जो इसके महत्व को प्रदर्शित करता है। प्राचीन धार्मिक ग्रंथों के अनुसार ब्रह्माण्ड के सृजन के पहले यह मंत्र ही संपूर्ण दिशाओं में व्याप्त रहा है। सर्वप्रथम इसकी ध्वनि को सृष्टि का प्रारंभ माना गया है। ओउम् के महत्व को अन्य धर्मों ने भी माना है।