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Yoga Ke Prakar - Types of Yoga Poses - Types of Yoga Asanas

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सूर्य नमस्कार

सूर्य नमस्कार :- सूर्य नमस्कार करने से मनुष्य का शरीर निरोग और स्वस्थ रहता है। सूर्य नमस्कार की दो स्थितियां होती है। पहले दायें पैर से और दूसरा बायें पैर से।

शीर्षासन

शीर्षासन :- इसको सिर के बल किये जाने की वजह से इसको शीर्षासन कहते हैं। इससे पाचनतंत्र ठीक रहता है और साथ ही मस्तिष्क में रक्त संचार भी बढ़ता है। जिससे स्मरण शक्ति ठीक रहती है।

अर्ध चन्द्रासन

अर्ध चन्द्रासन:- इस आसन को करते समय शरीर को अर्ध चन्द्र के आकार में घुमाया जाता है। इस आसन को भी खड़े होकर किया जाता है। ये आसन पूरे शरीर के लिये लाभदायक है।

भुजंग आसन

भुजंग आसन :- इस आसन को करने से मनुष्य की कमर की सारी परेशानियां

बाल आसन

बाल आसन :- इस आसन से तनाव दूर होता है । शरीर को संतुलित तथा रक्त संचार को सामान्य बनाने के लिये इस आसन को किया जाता है।

मर्जरियासन

मर्जरियासन :-यह आसन शरीर को उर्जावान और सक्रिय बनाये रखने के लिये बहुत लाभदायक है। इस आसन से रीढ़ की हड्डियों में खिंचाव होता है जो शरीर को लचीला बनाता है।

नटरासन

नटरासन :- इस आसन को करने से फेफड़ों की कार्यक्षमता बढ़ती है। इस आसन से कंधे मजबूत होते हैं और साथ ही बाहें तथा पैर भी मजबूत होते हैं। जिन व्यक्तियों को लगातार काम करना होता है उनके लिये यह आसन सबसे उत्तम है।

हलासन

हलासन :- इस आसन को करने से रीढ़ की हड्डियां लचीली रहती हैं। वृद्धावस्था में हड्डियों की विभिन्न प्रकार की परेशानियां हो जाती हैं। यह आसन पेट के रोग, थायराइड, दमा, कफ तथा रक्त सम्बन्धी रोगों के लिये बहुत ही लाभका

सेतु बांध आसन

सेतु बांध आसन :- यह आसन पेट की मांसपेशियों और जंघों के लिये अच्छा व्यायाम है। जब आप इस योग का अभ्यास करते हैं तो शरीर में उर्जा का संचार होता है।

सुखासन

सुखासन :- इस आसन को पालथी मारकर सीधा बैठकर किया जाता है। यह आसन करने से मन को बहुत शांति प्राप्त होती है। इस आसन को करते समय नाक से सांस लेना और छोड़ना होता है।

ताड़ासन

ताड़ासन :-इस आसन के अभ्यास से शरीर सुड़ौल रहता है और इससे शरीर में संतुलन और दृढ़ता आती है।

कोणासन

कोणासन :-इस आसन को बैठकर दोनो पैर फैलाकर किया जाता है। कमर, रीढ़ की हड्डियां, छाती और कुल्हे इस योग मुद्रा में विशेष रूप से भाग लेते हैं। इन अंगों में मौजूद तनाव को दूर करने के लिये यह योग किया जाता है।

वज्रासन

वज्रासन :-इस आसन को घुटनों पर बैठकर किया जाता है। यह शरीर को सुड़ौल बनाने के लिये किया जाता है। यदि आपको पीठ और कमर दर्द की परेशानी होती है तो इस आसन को करने से काफी लाभ मिलेगा।

वृक्षासन

वृक्षासन :- इस आसन को एक पैर पर खड़े होकर किया जाता है। इस आसन को करने से शारीरिक तनाव दूर होता है और पैरों एवं टखनों में लचीलापन रहता है।

दंडासन

दंडासन :- इस आसन को बैठकर दोनो पैर सामने जोड़कर किया जाता है। इस आसन को प्रतिदिन करने से हिप्स और पेडू में मौजूद तनाव दूर होता है।

अधोमुखी

अधोमुखी :- इस आसन को नीचे की ओर सिर झुकाकर किया जाता है। इसलिये इसे अधोमुखी आसन कहा जाता है। ये आसन मुद्रा मेरूदंड को सीधा बनाये रखने में सहायक होता है। ये पैरों की मांसपेशियों के लिये अच्छा व्यायाम है।

श्वासन

श्वासन :-इस आसन को मरे शरीर जैसे निष्क्रिय होकर किया जाता है। इसे करने से शरीर की थकान और मानसिक परेशानी दूर होती है और नई उर्जा प्रदान होती है।

उत्कट आसन

उत्कट आसन :-इस आसन को करने से शरीर के निचले हिस्से कमर, घुटने और पैरों में मजबूती आती है। योग की इस मुद्रा से रीढ़ की हड्डियों को भी लाभ पहुंचता है।

गोमुखासन

गोमुखासन :- संस्कृत में गोमुख का अर्थ होता है गाय का चेहरा या गाय का मुख। इस आसन में पांव की स्थिति बहुत हद तक गोमुख की आकृति जैसे होती है। इसीलिये इसे गोमुखासन कहा जाता है। यह महिलाओं के लिये अत्यंत लाभदायक आस

उष्ट्रासन

उष्ट्रासन :-‘उष्ट्र’ एक संस्कृत भाषा का शब्द है और इसका अर्थ ‘ऊंट’ होता है। उष्ट्रासन एक मध्यवर्ती पीछे झुकने योग आसन है जो अनाहत (हृदय चक्र) को खोलता है। इस आसन से शरीर में लचीलापन आता है। शरीर को ताक मिलती तथा प